विश्वविद्यालय का शारदा सभागार साक्षी बना एक रचनात्मक साहित्यिक कार्यक्रम का जब स्कूल ऑफ़ लैंग्वेजेज़ ने 20 मई को हिंदी के प्रख्यात कवि सुमित्रानंदन पंत की जयंती समारोहपूर्वक मनायी। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के विभिन्न संकायों और विभागों के विद्यार्थी और शिक्षक उत्साहपूर्वक सम्मिलित हुए।
एसजीएसयू के माननीय कुलाधिपति डॉ. सिद्धार्थ चतुर्वेदी, कुलपति महोदय डॉ. विजय सिंह, कुलसचिव डॉ. सीतेश सिन्हा और डीन (एकैडेमिक्स) डॉ. वी. के. गुप्ता और डीन (स्टूडेंट वेल्फेयर) डॉ. विनोद शर्मा की प्रेरणा और प्रोत्साहन से यह आयोजन किया गया। आयोजन की संकल्पना और उसका संचालन डॉ. स्मिता तिवारी, एसोसिएट प्रोफ़ेसर (हिंदी) द्वारा किया गया। इस आयोजन में विभिन्न विभागों के वरिष्ठ प्रोफ़ेसर और अन्य शिक्षकगण की उपस्थिति ने छात्र-छात्राओं का उत्साह बढ़ाया।
डॉ. स्मिता ने सर्वप्रथम आयोजन में पधारे सभी आदरणीय शिक्षकों, विद्यार्थियों और अन्य श्रोताओं का स्वागत करते हुए आयोजन के उद्देश्य पर प्रकाश डाला। उनके अनुरोध पर स्कूल ऑफ मार्डन साइंस के वरिष्ठ प्रोफ़ेसर सत्येंद्र खरे, स्कूल ऑफ़ एजुकेशन से प्रोफ़ेसर (डॉ.) संजू शर्मा, प्रोफ़ेसर (डॉ.) नीलम सिंह, स्कूल ऑफ़ फाइन आर्ट्स से डॉ. अर्जुन सिंह और अन्य वरिष्ठजन ने ज्ञानदायिनी माँ शारदे की प्रतिमा पर माल्यार्पण करते हुए दीप प्रज्वलित किया और आयोजन का मंगलमय शुभारंभ हुआ। स्नातक प्रथम वर्ष की छात्रा सुश्री नेहा यादव ने सुमधुर सरस्वती वंदना से श्रोताओं का मन मोह लिया।
इस अवसर पर बोलते हुए डॉ. संजू शर्मा ने इस बात को प्रमुखता से रेखांकित किया कि आज टेक्नॉलोजी और एआई के युग में हम भौतिक प्रगति की अंधी दौड़ में इतने व्यस्त हैं कि हम अपने व्यक्तित्व के आध्यात्मिक पक्ष को निरंतर नज़रअंदाज कर रहे हैं। यही कारण है कि हमारा जीवन रस सूखता जा रहा है। उन्होंने स्कूल ऑफ़ लैंग्वेजेज़ की इस पहल को अत्यंत सार्थक बताया और कहा कि ऐसे आयोजन बार-बार होते रहने चाहिए ताकि हमारे मस्तिष्क के साथ-साथ हमारे मन को, हमारे हृदय को ज़रूरी खुराक़ मिलती रहे। डॉ. शर्मा ने इस अवसर पर पंत जी की एक कविता का पाठ भी किया।
इस मौके पर डॉ. सत्येंद्र खरे को सुनने का अवसर भी श्रोताओं को मिला जिन्होंने प्रो. संजू शर्मा के विचारों को आगे बढ़ाते हुए कहा कि जो गर्मजोशी, जीवन के प्रति जो उत्साह और ललक सामान्य तौर पर होनी चाहिए, वह दुर्लभ होती जा रही है। साहित्य और उसमें भी खास तौर पर कविता हमारे व्यक्तित्व में रस घोलने का कार्य करती है और इस प्रकार के आयोजन हमें इसका एक सुंदर अवसर प्रदान करते हैं। श्री खरे सर ने ‘रास्ता’ शीर्षक स्वरचित कविता सुनाकर श्रोताओं का दिल जीत लिया। उनके अलावा डॉ. नीलम सिंह, डॉ. नितिन डिमोले, मैडम सुधा तिवारी ने भी हिंदी के वर्ड्सवर्थ के रूप में विख्यात कविवर पंत जी की कविताओं का पाठ किया। अन्य सम्मानित शिक्षकों में स्कूल ऑफ बैंकिग,फाइनांस एंड कॉमर्स से डॉ. मीनाक्षी दयाल और ट्रेनिंग एंड प्लेसमेंट सेल के अध्यक्ष श्री धीरज प्रसाद के साथ उनकी टीम श्री संदीप, श्री यश एवं आस्था मैडम ने अपनी सक्रिय उपस्थिति से आयोजन को सफलता प्रदान की। सभी ने इस आयोजन की मुक्त कंठ से सराहना की और आशा व्यक्त की कि इस प्रकार के आयोजनों का सिलसिला चलता रहना चाहिए।
कार्यक्रम का संचालन करते हुए डॉ. स्मिता ने सुमित्रानंदन पंत के काव्य की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डाला और बताया कि पंत जी आधुनिक हिंदी कविता के स्वर्णकाल- छायावाद – के चार प्रमुख कवियों में से एक हैं। इसीलिए यह विचार किया गया कि उनकी जयंती को अपने विद्यार्थियों के लिए एक रचनात्मक मंच प्रदान करने के अवसर के रूप में इस्तेमाल किया जाए। कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए डॉ. स्मिता ने विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों सुश्री हंसुनी, अंकित और पवन पटेल को पंत जी की प्रतिनिधि कविताओं के पाठ हेतु आमंत्रित किया। ‘प्रथम रश्मि’, ‘ग्रामश्री’ और ‘पावस ऋतु में पर्वत प्रदेश’ जैसी सुमधुर कविताएँ सुनकर श्रोताओं ने करतल ध्वनि से विद्यार्थियों के सुंदर काव्य-पाठ को सराहा।
उल्लेखनीय है कि हिंदी के कुछ छात्र इस कार्यक्रम से ऑन-लाइन भी जुड़े हुए थे। आयोजन में डीन (स्टूडेंट वेल्फेयर) और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ प्रोफ़ेसर और अन्य शिक्षकगण की उपस्थिति छात्र-छात्राओं का उत्साह बढ़ा रही थी। कार्यक्रम के अंतिम चरण में श्री पवन कुमार शर्मा, असिस्टेंट प्रोफ़ेसर (हिंदी) ने सभी गणमान्य शिक्षकों एवं काव्य प्रस्तुति देने वाले विद्यार्थियों के प्रति विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि सभागार की व्यवस्था से लेकर फोटोग्राफी तक विविध रूपों में मिले सहयोग के फलस्वरूप ही यह आयोजन संभव हो सका है। इसके लिए आयोजन से प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े सभी साथी हार्दिक धन्यवाद के पात्र हैं। अंत में श्री शर्मा ने श्रोताओं से राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन करने का आग्रह किया।
आइए, देखते हैं इस आयोजन की कुछ झलकियाँ …
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